उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राजकीय महाविद्यालय रानीखेत में देवभूमि उद्यमिता योजना और इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्थानीय लोक कला एवं संस्कृति महोत्सव’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से जहां उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को याद किया गया,
वहीं युवाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता के प्रति प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश चंद्र ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने उत्तराखंड राज्य निर्माण के संघर्ष और आंदोलनकारियों के योगदान को याद किया। इस अवसर पर छात्राओं अलीसा और महक ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए पर्वतीय संस्कृति, राज्य आंदोलन और उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान पर प्रकाश डाला।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविद् प्रो. जया भट्ट मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। देवभूमि उद्यमिता योजना के संयोजक डॉ. आशुतोष विक्रम ने राज्य निर्माण से जुड़े सामाजिक एवं ऐतिहासिक पहलुओं की जानकारी दी। वहीं, डॉ. बविता ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग की डॉ. अर्चना जोशी ने किया। इस दौरान गुलदावरी संस्था के अध्यक्ष भी मौजूद रहे। महोत्सव में विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए उद्यमिता एवं स्वरोजगार आधारित स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। 10 से अधिक विद्यार्थियों ने स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक उत्पादों को आधार बनाकर अपने स्टॉल लगाए और अपनी रचनात्मकता के साथ व्यावसायिक प्रतिभा का परिचय दिया।
इनमें कुमारी तृप्ति, टीना, गीता और निशा राहुल सहित अन्य विद्यार्थियों ने अपने उत्पादों एवं कलात्मक कार्यों के माध्यम से आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। मुख्य अतिथि प्रो. जया भट्ट ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के भीतर उद्यमिता की सोच विकसित करना आवश्यक है। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक हुनर में रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
इनके बेहतर उपयोग से युवा नौकरी तलाशने के बजाय स्वयं रोजगार के अवसर पैदा करने में सक्षम बन सकते हैं। महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं की सहभागिता से आयोजित यह महोत्सव उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
