मुंबई ब्लास्ट के आरोपी दाऊद को मरने की योजना बनाने वाले पीपी उर्फ़ डॉन प्रकाश पांडेय इन दिनों अल्मोड़ा जेल में रह कर उम्रकैद की सजा काट रहा है। इसी बीच अपने पिता की 13 दिन पहले हुई मृत्यु के बाद पीपलपानी में शामिल होने के लिए 7 घंटे की पैरोल मंजूर हुई थी। बीते बृहस्पतिवार की सुबह 9 बजे सुरक्षा के बीच अल्मोड़ा से हल्द्वानी के काठगोदाम स्थित अपने घर पहुंचा। वहीं, पीपी दोपहर 3 बजे वापस अल्मोड़ा जेल के लिए रवाना हुआ। घर पहुंचने पर पीपी को संन्यासी रूप में देख कर स्थानीय लोगो को काफी हैरानी हुई। दरअसल, प्रकाश पांडेय अब एक संन्यासी का रूप धारण कर चुके हैं। पीपी ने 17 मार्च को अल्मोड़ा जेल प्रशासन को पत्र लिखकर संन्यासी बनने व मंदिर में पूजा-पाठ करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन जेल प्रशासन ने जेल के बाहर पूजा पाठ की अनुमति दी थी। इसके बाद, 28 मार्च को काठमांडू के नाथ संप्रदाय के आचार्य दंडीनाथ महाराज ने अल्मोड़ा जेल के अंदर जेल प्रशासन की निगरानी में पीपी को संन्यास की दीक्षा दिलाई। इसके बाद प्रकाश पांडे का नाम बदलकर ‘योगी प्रकाश नाथ’ कर दिया गया। मिली हुई जानकारी के मुताबिक जानकारी सामने आई है कि प्रकाश पांडेय मुंबई ब्लास्ट के आरोपी दाऊद और छोटा राजन के बीच तकरार के दौरान छोटा राजन के संपर्क में आए थे। इसके बाद उन्होंने दाऊद को मारने की योजना बनाई थी। वर्ष 2010 में पीपी वियतनाम से गिरफ्तार हुए थे। सितारगंज, पौड़ी आदि के बाद वह अल्मोड़ा जेल में बंद है। पीपी के ‘संन्यासी’ बनने की घटना स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ लोग इस पर विश्वास करते हैं कि पीपी वाकई संन्यासी बन गए हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यह केवल एक नया ढोंग है।
