चमोली में आपदा से प्रभावित धुर्मा गांव इस बार नवरात्रि उत्सव से दूर रहेगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक लापता दो ग्रामीणों का पता नहीं चलता, तब तक वे किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन में भाग नहीं लेंगे। आमतौर पर नवरात्र के अवसर पर गांव में रौनक रहती थी और पांडव लीला जैसे पारंपरिक कार्यक्रमों से माहौल जीवंत हो उठता था। लेकिन इस बार न तो पांडव लीला होगी और न ही दशहरे पर होने वाली शादियों में कोई विशेष उत्सव दिखाई देगा। ग्रामीणों ने तय किया है कि विवाह समारोह भी सामान्य तरीके से ही सम्पन्न होंगे। आपदा को हुए एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन गांव के लोग अब भी गहरे सदमे में हैं। नवरात्रि शुरू होने के बावजूद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। आपदा ने लोगों को ऐसे घाव दिए हैं जिन्हें भरने में लंबा समय लगेगा। ग्रामीणों की चिंता अब सिर्फ अपने भविष्य और सुरक्षित जीवन को लेकर है।
