हल्द्वानी से जुडा एक बहुत बड़ा मामला सामने आ रहा है यहाँ पर स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल कुमाऊं का सबसे बड़ा अस्पताल है लेकिन संवेदनशीलता बिलकुल ज़ीरो है। दूर दराज पहाड़ो पर रह रहे परिवार बड़ी उम्मीद लेकर अपने बच्चों और परिजनों को इलाज के लिए यहां लाते हैं लेकिन सुशीला तिवारी अस्पताल प्रबंधन को इसकी ज़र्रा बराबर भी परवाह नहीं। दरसल बृहस्पतिवार को बागेश्वर जिले के गरुड़ के पाटली के रहने वाला परिवार अपने 11 साल के बेटे कृष्णा को हंसता खेलता अस्पताल में लाए थे लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की वजह से उन्हें मासूम का शव ले जाना पड़ा। परिजनों से मिली हुई जानकारी के अनुसार उस बच्चे को ब्रेन हेमरेज हुआ था। और उसका ऑपरेशन किया जाना था पर यह ऑपरेशन नहीं हो सका। जिस पर बच्चे के परिजनों ने ऑपरेशन में देरी का आरोप लगाया। न्यूरो सर्जरी-एनेस्थीसिया विभाग इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन मामले की जांच कराने की बात कह रहा है। पांच अक्तूबर को घर के पास खेलते समय वह चोटिल हो गया था। उसके सिर में चोट लगी थी। बच्चे को गरुड़ के निजी अस्पताल लेकर गए थे। वहां से उसे अल्मोड़ा के बेस अस्पताल रेफर किया गया। अल्मोड़ा से हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए भेज दिया गया। बताया कि पांच अक्तूबर की रात नौ बजे बच्चे को एसटीएच की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। यहां से बच्चे को न्यूरोसर्जरी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। सीटी स्कैन से ब्रेन हैमरेज का पता चला। ऑपरेशन से पहले बच्चे ने अपनी मां को बताया कि उसके सिर में दर्द हो रहा है। वहां मौजूद स्टाफ ने बच्चे से बोला कि हाथ-पैर हिलाओ दर्द सही हो जाएगा। इसके कुछ घंटों बाद ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।
