उत्तराखंड में नकली और ख़राब गुणवत्ता वाली दवाओं के खिलाफ सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऑपरेशन क्लीन अभियान शुरू करने की घोषणा की है। सीएम धामी के निर्देश पर 20 जुलाई (शनिवार) से शुरू हो रहे इस विशेष अभियान का उद्देश्य प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण दवाओं को सुनिश्चित करना और नशामुक्त समाज की दिशा में ठोस कदम उठाना है। अभियान की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने आठ सदस्यीय क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित की है, जिसकी कमान सहायक औषधि नियंत्रक हेमंत सिंह नेगी को सौंपी गई है।पूरे राज्य में होगी सघन जांच- स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य प्रदेश को नशामुक्त उत्तराखंड बनाने के साथ गुणवत्ता युक्त दवाएं उपलब्ध कराना है। यह कार्रवाई औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियम 1945 के तहत की जाएगी। जिसके चलते प्रदेशभर में नकली दवा बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अभियान में नकली, अधोमानक, मिसब्रांडेड और मादक दवाओं के निर्माण, भंडारण और बिक्री में संलिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं, नेपाल सीमा और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी विशेष निगरानी रखी जाएगी।
टीम में शामिल होंगे यह अधिकारी-
QRT क्यूआरटी में सहायक औषधि नियंत्रक मुख्यालय डॉ. सुधीर कुमार, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक मुख्यालय नीरज कुमार, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नैनीताल मीनाक्षी बिष्ट, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक टिहरी सीपी नेगी, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक हरिद्वार अनिता भारती, औषधि निरीक्षक देहरादून मानवेन्द्र सिंह राणा, औषधि निरीक्षक मुख्यालय निशा रावत, औषधि निरीक्षक मुख्यालय गौरी कुकरेती शामिल हैं।
जिलों को दो श्रेणियों में बांटा-
औषधि निरीक्षण को प्रभावी बनाने के लिए जिलों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
श्रेणी-1: देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी।
श्रेणी-2: अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी, चंपावत। हर सप्ताह इन जिलों से लिए गए औषधि नमूनों की प्राथमिकता के आधार पर जांच होगी।
आम जनता भी कर सकती है शिकायत-
खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने नकली दवाओं की जानकारी देने के लिए एक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 18001804246 भी जारी किया है, जिससे आम जनता भी इस मुहिम में भागीदार बन सकती है।
