अब सरकारी अस्पतालों से मरीजों को रेफर करना इतनी आसानी से नहीं होगा। अस्पतालों में अनावश्यक रेफर की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस पर सख्ती बरतने का फैसला लिया है। सचिवालय में आयोजित बैठक में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि अब रेफर प्रक्रिया पूरी तरह जवाबदेही के दायरे में लाई जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हुई इस बैठक में सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों (CMO) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (CMS) को निर्देश दिए गए कि मरीजों को रेफर करने से पहले स्पष्ट कारण दर्ज करना और संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।बैठक में स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि रेफर प्रणाली के लिए जल्द ही एक मानक प्रचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि कुछ अस्पतालों में संसाधन प्रबंधन की कमी या लापरवाही के चलते बिना कारण मरीजों को रेफर किया जाता है, जिससे मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। अब से प्रत्येक रेफर केस की जिम्मेदारी संबंधित CMS पर होगी, जिन्हें न केवल कारण बताना होगा बल्कि दस्तावेजों में अपनी स्वीकृति भी देनी होगी। अनावश्यक रेफर की स्थिति में संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
