उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नगर निकाय और ग्राम पंचायत की दोहरी मतदाता सूची से जुड़े विवाद में शुक्रवार को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग के उस निर्देश पर रोक लगा दी जिसमें तय करना था कि जिन लोगों के नाम दोनों वोटर लिस्ट में हैं, उन्हें मतदान का अधिकार दिया जाए या नहीं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि एक व्यक्ति केवल एक ही स्थान से मतदान कर सकता है और वहीं से चुनाव भी लड़ सकता है। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी नागरिक को वोट डालने या चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि यह उसका संवैधानिक अधिकार है। कहा कि वो चुनाव प्रक्रिया रोकने के पक्ष में नहीं है। बता दें कि पंचायतीराज एक्ट की धारा-9 की उपधारा 13 यह कहती है कि किसी मतदाता व उम्मीदवार का नाम दो जगह है, तो उसका नाम वोटर लिस्ट से न काटा जाए। जबकि उपधारा 6 यह कहती है, कि एक व्यक्ति का एक ही वोटर लिस्ट में नाम होना चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
