अल्मोड़ा।आबादी वाले क्षेत्रों में मानव सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरों में कभी-कभी बंदर या बिल्ली जैसे छोटे जानवर फंस जाना एक स्वाभाविक घटना है। इसे विभाग की लापरवाही बताना तथ्यहीन और भ्रामक है।वन विभाग के अनुसार पिंजरे विशेष रूप से तेंदुए जैसे बड़े और खतरनाक वन्य जीवों को पकड़ने के लिए बनाए जाते हैं,
ताकि मानव जीवन को सुरक्षित रखा जा सके। पिंजरे में दरवाजा इस तरह डिजाइन होता है कि जैसे ही कोई जानवर अंदर प्रवेश करता है, वह स्वतः बंद हो जाता है। जंगल और आबादी के बीच आवाजाही करने वाले जानवरों की वजह से कभी-कभी अन्य जीव भी उसमें प्रवेश कर जाते हैं।वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि खुले इलाकों में घूमने वाले बंदर, बिल्ली या अन्य छोटे जीवों का पिंजरे में जाना एक प्राकृतिक व्यवहार है, क्योंकि उन्हें अंदर रखा चारा या गंध आकर्षित करती है।
इसका अर्थ यह नहीं कि पिंजरा उनके लिए लगाया गया था या किसी प्रकार की लापरवाही हुई है।वन विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई अन्य जानवर गलती से पिंजरे में फंस जाता है तो उसे सुरक्षित तरीके से तुरंत बाहर निकाल दिया जाता है। विभाग का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और लोगों की जान-माल की सुरक्षा करना है।
इसलिए पिंजरे में किसी अन्य जानवर का फंसना एक तकनीकी और प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, न कि किसी की गलती।
