केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में एक बिल पेश करने जा रही है, जो महापंजीयक (Registrar General) को राष्ट्रीय स्तर पर जन्म और मृत्यु के पंजीयन का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाए रखने की अनुमति देगा। इस डेटा का इस्तेमाल मतदाता सूची, जनसंख्या रजिस्टर, आधार, पासपोर्ट, राशन कार्ड आदि को अपडेट करने के लिए किया जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि 18 साल का होने पर खुद ब खुद वोटर कार्ड बन जाएगा और लोगों को इसके लिए निर्वाचन कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
गृहमंत्री शाह ने बताया पूरा प्लान
गृहमंत्री अमित शाह ने महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के कार्यालय ‘जनगणना भवन’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि जनगणना के आंकड़ों पर आधारित योजना से यह सुनिश्चित होता है कि विकास गरीब से गरीब व्यक्ति तक पहुंचे। अमित शाह ने यह भी कहा कि यदि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के आंकड़ों को विशेष तरीके से संरक्षित किया जाए तो विकास कार्यों की समुचित योजना बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जनगणना क ऐसी प्रक्रिया है जो विकास के एजेंडे का आधार बन सकती है।
18 साल को होते ही खुद बन जाएगा वोटर कार्ड
शाह ने कहा कि इस बदलाव से चुनाव आयोग एक सॉफ्टवेयर के जरिए रजिस्ट्रार ऑफ इंडिया के कार्यालय और डेटा बेस से जुड़ा होगा और जब कभी किसी मतदाता की मौत होगी, उसकी सूचना स्वत: साफ्टवेयर के जरिए चुनाव आयोग तक पहुंच जाएगी। आयोग मतदाता की मृत्यु की सूचना के तुरंत बाद उसके नाम को मतदाता सूची से काटने की उचित प्रक्रिया अपनाएगा। शाह ने कहा कि ठीक इसी तरह किसी की उम्र 18 वर्ष होते ही मतदाता सूची में उसका नाम नए मतदाता के तौर पर स्वत: शामिल कर लिया जाएगा और उसका वोटर कार्ड बन जाएगा।
कहां-कहां जरूरी होगा जन्म पंजीयन
नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित संशोधन में कहा गया है कि शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश के लिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण डेटा आवश्यक होगा। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, मतदाता सूची तैयार करने, विवाह का पंजीकरण, केंद्र सरकार या राज्य सरकार में नियुक्ति या स्थानीय निकाय और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नियुक्ति; अथवा पासपोर्ट आदि बनवाने में भी जन्म पंजीकरण डेटा जरूरी होगा।
