चैत्र नवरात्रि 2026 का शुभारंभ: प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा, जानें महत्व, कथा और विधि
अल्मोड़ा / संपादक वेद प्रकाश बिनवाल…….
हिंदू धर्म में पवित्र पर्व चैत्र नवरात्रि का आज से विधिवत शुभारंभ हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है।
कलश स्थापना के साथ हुई शुरुआत
पहले दिन भक्त विधि-विधान से कलश स्थापना (घटस्थापना) करते हैं, जो नवरात्रि पूजा का प्रमुख अनुष्ठान माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन से घरों और मंदिरों में शक्ति की साधना प्रारंभ होती है।
मां शैलपुत्री का स्वरूप और महत्व
मां शैलपुत्री को शक्ति का मूल रूप माना जाता है। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है तथा ये वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं। धार्मिक मान्यता है कि उनकी पूजा करने से जीवन में स्थिरता, शक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां शैलपुत्री पूर्व जन्म में सती थीं। जब उनके पिता दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया, तो सती ने यज्ञ कुंड में स्वयं को समर्पित कर दिया। अगले जन्म में वे हिमालय के घर जन्मीं और शैलपुत्री कहलायीं। बाद में उन्होंने भगवान भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त किया।
पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें
मां शैलपुत्री को सफेद पुष्प अर्पित करें
धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर विधिवत पूजा करें
दुर्गा सप्तशती या मंत्रों का पाठ करें
भोग और आरती
मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं विशेष प्रिय हैं। उन्हें घी का भोग लगाया जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
आरती के माध्यम से मां का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है और भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।
आध्यात्मिक लाभ
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा चंद्र ग्रह को मजबूत करती है, जिससे मन शांत रहता है और नकारात्मकता दूर होती है।
