देश को आजाद हुए भले ही 78 साल बीत चुके हों, लेकिन आज भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इसका ताजा उदाहरण सामने आया है अल्मोड़ा जिले के खसपड़ गांव में, जहां गंभीर रूप से बीमार ग्रामीणों को सड़क न होने के कारण डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ा। खसपड़ और क्वैराली गांव मुख्य सड़क से अब भी तीन से चार किलोमीटर दूर हैं। बीते दिनों गांव के दो से तीन गुर्जर बीमार पड़ गए। हालत बिगड़ने पर ग्रामीणों ने डोली का सहारा लिया और कई किलोमीटर पैदल चलकर उन्हें मुख्य मार्ग तक लाया गया, जहां से आगे वाहन से अस्पताल पहुंचाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में त्रिशूल वेलफेयर समिति के सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े रहे। समिति के अध्यक्ष अजय सुयाल, पंकज पांडे, मयंक बगड़वाल, अमित जोशी, सूरज बिष्ट, मुकुल सुयाल और अजय सहित कई लोगों ने बीमारों को सुरक्षित घरों से डोली में बैठाकर सड़क तक पहुंचाया और फिर अस्पताल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा न मिलना बेहद दुखद है। सड़क न होने से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं बल्कि शिक्षा और रोजगार के अवसर भी सीमित हैं। यही वजह है कि लोग धीरे-धीरे गांव छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं और गांव की आबादी लगातार घट रही है।
