अल्मोड़ा। भक्ति, परंपरा और उत्साह के अद्भुत संगम के साथ गुरुवार को अल्मोड़ा नगर नन्दा देवी महोत्सव में सराबोर रहा। नगरभर में निकली स्कूली बच्चों की भव्य झांकियों और मंदिर प्रांगण में प्रस्तुत हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को नन्दामय बना दिया। राजा आनंद सिंह बालिका इंटर कॉलेज से प्रारंभ हुई शोभायात्रा जब मुख्य बाजार से होकर गुज़री तो नगरवासियों ने तालियों और जयकारों से बच्चों का स्वागत किया। मां नन्दा-सुनन्दा के जयकारों से गूंजता नगर भक्तिमय हो उठा। माँ नन्दा देवी मंदिर परिसर में पहुँचे विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक लोकनृत्य, नाट्य मंचन और धार्मिक झांकियों के माध्यम से देवभूमि की समृद्ध संस्कृति का शानदार प्रदर्शन किया। दर्शक हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट से प्रांगण को गुंजायमान करते रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन नगर निगम महापौर अजय वर्मा, अध्यक्ष कुमाऊँ मण्डल एक्स पैरामिलिट्री फोर्स पर्सनल वेलफेयर सोसायटी मनोहर सिंह नेगी, पार्षदगण एवं मेला समिति के सदस्यों ने संयुक्त रूप से किया। महापौर ने इस अवसर पर कहा कि “नन्दा देवी महोत्सव हमारी लोक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, जिसे नगरवासी मिलकर और भव्य बनाते हैं।”अल्मोड़ा के प्रमुख विद्यालयों—जीजीआईसी, अल्मोड़ा इंटर कॉलेज, विवेकानंद बालिका इंटर कॉलेज, महर्षि विद्या मंदिर, महिला पॉलिटेक्निक, स्प्रिंग डेल्स, पाइनबुड, बोधी ट्री सहित अन्य स्कूलों ने शानदार झांकियां प्रस्तुत कीं। कुमाऊँनी छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी और लोक परिधानों में बच्चों की प्रस्तुतियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। निर्णायक मंडल के मोहन जोशी, नीरज सिंह बिष्ट और हर्ष टम्टा ने विद्यालयों की प्रस्तुतियों को उत्कृष्ट बताया और कहा कि बच्चों की सृजनात्मकता ने आयोजन को नई ऊंचाई दी है। मेला समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा, सचिव मनोज सनवाल, सांस्कृतिक संयोजक तारा जोशी और अन्य पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संभाला। सुरक्षा और यातायात नियंत्रण में पुलिस एवं प्रशासन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। भव्य सांस्कृतिक संध्या और माँ नन्दा देवी की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। भीड़भाड़ से भरे नगर में सभी आयु वर्ग के लोग झांकियों और प्रस्तुतियों का आनंद लेते दिखे। नगरवासियों का कहना था कि नन्दा देवी महोत्सव न केवल आस्था का पर्व है, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता और लोकसंस्कृति के संरक्षण का संदेश भी देता है।
