अल्मोड़ा। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों को संरक्षित करने की दिशा में अल्मोड़ा जनपद के चौना गांव ने एक प्रेरणादायक पहल की है। गांव के प्राचीन ‘नौले’ का पुनरुद्धार कर उसे फिर से जीवंत किया गया है, जिससे ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।
पर्वतीय क्षेत्रों में पानी की समस्या और इसके लिए महिलाओं का संघर्ष किसी से छिपा नहीं है। चौना गांव में भी पिछले कई वर्षों से ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को पेयजल के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
गर्मियों के मौसम में आसपास के कई प्राकृतिक स्रोत सूख जाने से समस्या और बढ़ जाती थी।इसी समस्या के समाधान के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनी मिनरल्स टेक्नोलॉजीज (MTI) के सहयोग से गांव के ऐतिहासिक नौले का भव्य पुनरुद्धार किया गया।
इस कार्य के पीछे वैज्ञानिक योजना और ग्रामीणों का कठिन परिश्रम रहा।पेयजल की निरंतरता बनाए रखने के लिए पिछले वर्ष नौले के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बड़ी संख्या में रिचार्ज पिट (खंती) खोदे गए।
इन गड्ढों के माध्यम से वर्षा जल जमीन के भीतर समाहित होकर भूजल स्तर को रिचार्ज करता है, जिसका सीधा लाभ अब इस प्राचीन नौले को मिल रहा है।पुनरुद्धार के दौरान नौले की पारंपरिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए इसे कुमाऊँनी वास्तुकला के अनुरूप सुंदर रूप दिया गया है।
पहाड़ की भीषण गर्मियों में जब अन्य जल स्रोत सूखने लगते हैं, तब यह नौला ग्रामीणों को शीतल और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का प्रमुख स्रोत बनता है।नौले के पुनरुद्धार से खुश होकर पूर्व ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख गोपाल खोलिया, ग्राम प्रधान रमा खोलिया और समिति की कोषाध्यक्ष आरती बोरा सहित समस्त ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त की।
उन्होंने मिनरल्स टेक्नोलॉजीज (MTI) का आभार जताते हुए कहा कि इस पहल से न केवल पानी की समस्या का समाधान हुआ है, बल्कि गांव की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर भी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो गई है।
