मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग जागेश्वर महादेव मंदिर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी दुर्लभ एवं अलौकिक ‘घृत कमल’ परंपरा का विधिवत आयोजन किया जाएगा। यह अनूठी धार्मिक परंपरा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।मंदिर के पुजारियों द्वारा मकर संक्रांति के दिन कड़ाके की ठंड से भगवान शिव को संरक्षण देने हेतु शिवलिंग पर शुद्ध घी का लेप किया जाता है। सैकड़ों किलोग्राम घी को ठंडे जल से धोकर उसे भव्य कमल पुष्प एवं गुफा के आकार में परिवर्तित किया जाता है, जिसे ‘घृत कमल’ कहा जाता है।मान्यता है कि मकर संक्रांति से कुंभ संक्रांति तक लगभग एक माह तक भगवान शिव इस घृत गुफा में गहन ध्यानावस्था में विराजमान रहते हैं। इस अवधि में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं।एक माह पश्चात जब घी को उतारा जाता है, तो उसे भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह घी औषधीय गुणों से युक्त होता है और अनेक शारीरिक व्याधियों में लाभकारी माना जाता है।14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति) को होने वाले इस आयोजन को लेकर जागेश्वर धाम में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। श्रद्धालुओं में इस अद्भुत परंपरा को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
