अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना परिसर को शोध अभिलेखों के जांच के अधिकार मिल चुके है। जिससे शोधार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। आपको बता दे की ड्रीलबिट सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्थानीय स्तर पर शोध अभिलेखों की जांच की जाएगी और साथ ही साहित्यिक चोरी भी पकड़ में आएगी। सूचना और पुस्तकालय नेटवर्क (इनफ्लिबनेट) ने सोबन सिंह जीन परिसर को शोध अभिलेखों के जांच के अधिकार दिए हैं। इससे पहले शोधार्थी अभिलेखों के जांच के लिए 60 किमी का सफर तय कर शोधार्थियों को कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल की दौड़ लगानी पड़ती थी। लेकिन अभी ड्रीलबिट सॉफ्टवेयर के जरिये अभिलेखों की जांच के बाद शोधार्थी को पुस्तकालय प्रबंधन प्रमाण पत्र देगा, इससे उनकी अन्य विवि पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।
