सामाजिक कार्यकर्ता विनय किरौला ने आज गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि अल्मोड़ा जिले में बीते दिनों उनके द्वारा ‘गांव चलो अभियान’ चलाया गया था। जिसका उद्देश्य गांव गांव जाकर ग्रामीणों के साथ बैठक कर शासन-प्रशासन तक ग्रामीणों की आवाज बन गांवो को बुनियादी आस्थापना से लैंस करना व गांवो को सामाजिक-आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना रहा। इस अभियान के तहत 200 से अधिक गांवों का भ्रमण किया गया। जिसमे ग्रामीणों के साथ मिल कर आंदोलनों, धरने आदि के माध्यम से बुनियादी जरूरतों- सड़क,पेयजल,जंगली जानवरों के आंतक से मुक्ति को लेकर प्रयास किये गए। इसके अतिरिक्त अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रामीणों में अपने अधिकारों को लेकर चेतना विकसित की गयी। ताकि ग्रामीण शासन-प्रशासन से अपने सरकार की विकास-योजनाओं के अपने अधिकारों को लेकर गांवों मे लामबंद हो मांग करे। इस अभियान के तहत उन्होंने भ्रमण के दौरान पाया कि गांव सड़क, पानी के आभाव, अनियोजित वितरण व जानवरों के आतंक से जुझ रहे हैं। गांवो मे संसाधनो की प्रचुरता के बावजूद भी पलायन है क्योंकि संसाधनो को इस ढंग से विकसित नही किया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रो मे आमदनी बढ सके जिससे रोजगार पैदा हो। उन्होंने बताया कि गांवो में उपलब्ध संसाधनो के जरिए गांव मे रोजगार व स्वावलंबन लाने के लिए गांव चलो अभियान 2.0 प्रारम्भ किया जा रहा है। ताकि गांव मे उपलब्ध मानव व प्राकृतिक संसाधन गांव के स्वावलंबन के साथ जुड़ सके और सरकारी विकास योजनाओं का ग्रामीण अधिक से अधिक लाभ ले सके।
