अल्मोड़ा। आस्था और परंपरा के प्रतीक माँ नन्दा देवी मेले में शनिवार की सुबह नगर का वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो गया। दुलागांव से विशेष अनुष्ठान के साथ लाए गए कदली वृक्षों को शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण कराते हुए मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। ढोल-दमाऊं की थाप, माँ नन्दा सुनन्दा के जयकारे और श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ ने नगर को पूरी तरह भक्ति में डुबो दिया। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने नारियल, फल-फूल और धूप-दीप अर्पित कर कदली वृक्षों का स्वागत किया। घर-घर दीप प्रज्वलित किए गए और मंदिर पहुंचने पर विशेष पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए। कार्यक्रम में नगर निगम महापौर अजय वर्मा, समिति के सचिव मनोज सनवाल, मेला संयोजक मंडल और अनेक जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मेला समिति के अनुसार, कदली वृक्षों का विशेष महत्व है क्योंकि इन्हीं से माँ की प्रतिमाएं निर्मित की जाती हैं जिन्हें बाद में विधिविधान से विसर्जित किया जाता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे माँ की सजीव उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। पूरे नगर में शोभायात्रा के दौरान लोकगायकों की मधुर प्रस्तुतियां और महिलाओं के मंगल गीतों ने माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया। मुख्य मार्गों से लेकर मंदिर परिसर तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और देर शाम तक दर्शन का क्रम जारी रहा। माँ नन्दा देवी महोत्सव न केवल अल्मोड़ा बल्कि पूरे कुमाऊं की सांस्कृतिक पहचान है। कदली वृक्ष का आगमन इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण है, जिसका इंतजार भक्त पूरे वर्ष करते हैं।
